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Sunday, 23 June 2019

हमारे जीवन का अनमोल व कड़बा सच/सत्य


(1)
मनुष्य जाति में दो पुराणी बुराइयां है| एक ताने मारने की और दूसरी आँख मारने की| पुरुष अगर आँख मारना और महिलाये ताने मारना बंद कर दे, तो जीवन और समाज के आधे संघर्ष ख़त्म हो जायेगे| अब तक जितने लोग नहीं मरे होंगे उससे भी ज्यादा लोग ताने और आंख मारने से मर चुके है| बस, अपनी आँखों और जुबान को संभाल लो, सब कुछ संभल जायेगा| आंख और जुबान बड़ी नालायक है, क्योकि सारी गड़बडिया इन्ही से शुरू होती है|  

(2)
मरने वाला मर कर स्वर्ग गया है या नरक? अगर कोई यह जानना चाहता है तो इसके लिए किसी संत या ज्योतिषी के पास जाने की जरुरत नहीं है, बल्कि उसकी शव-यात्रा में होने वाली बातो को गौर से सुनने की जरुरत है| यदि लोग कह रहे हो कि बहुत अच्छा आदमी था, अभी तो उसकी देश और समाज को बड़ी जरुरत थी, जल्दी चल बसा तो समझना कि वह स्वर्ग गया है| और यदि लोग रह रहे हों कि अच्छा हुआ, धरती का एक पाप तो कम हुआ तो समझना कि वह मरने वाला नरक गया है|

(3)
जिन्दगी के केवल चार दिन है और वे चार दिन भी दो आरजू और दो इतजार में कट जाते है| इससे आगे बढ़े तो इंसान की सिर्फ दो दिन की कुल जिन्दगी है और उन दो दिनों में एक दिन मौत का भी होता है| अब बचा केवल एक दिन और पता नहीं, इस एक दिन की जिन्दगी पर आदमी इतना क्यों अकड़ता है? जिन्दगी की हैसियत एक मुट्ठी राख से ज्यादा कुछ भी नहीं है|



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