(1)
हिन्दू और मुसलमान इस देश की दो आंखे है और ये दोनों कौमें खूब प्यार और मुहब्बत के साथ सदियों से कंधे से कन्धा और कदम से कदम मिलाकर रहती आ रही है| इस देश के मिजाज में नहीं है| और हो भी कैसे ? जरा गौर फरमाईये कि जब आप Ramzan लिखते है तो Ram से शुरुआत करते है और जब आप Deewali लिखते है तो Ali से समाप्त करते है ये रमजान में बसे राम और दिवाली में छिपे अली हमें मुहब्बत से रहने का पैगाम देते है| अगर राम के भक्त और रहीम से बन्दे थोड़ी अक्ल से काम ले तो यह मुल्क स्वर्ग से सुन्दर है |
(2)
श्मशान गाँव के बाहर नहीं
बल्कि शहर के बीच में चौराहे पर होना चाहिए| श्मशान उस जगह होना चाहिए जहाँ से
आदमी दिन में दस बार गुजरता है| ताकि जब जब वह वहां से गुजरे तो वहां जलती लाशो और
अध जले मुर्दों को देखकर उसे भी मृत्यु का ख्याल आ जाये और अगर ऐसा हुआ तो दुनिया
के 80 फीसदी पाप और अपराध स्वतः ख़त्म हो जायेगें| आज का आदमी भूल गया है कि एक दिन
उसे मर जाना है तुम कहते जरुर हो कि एक दिन सभी को मर जाना है पर उन मरने वालो में
तुम अपने को कहाँ गिनते हो|
(3)
जिस घर में और सब कुछ हो मगर
प्रेम न हो वह घर घर नहीं, श्मशान है| श्मशान में भी बहुत मुर्दे होते है मगर वे
आपस में न तो कभी मिलते है और न ही कभी बतियाते है जिस घर में पति-पत्नी,सास-बहु
और बाप-बेटे साथ रहते हो मगर एक दुसरे को देखकर मुस्कुराते न हो तो क्या वह घर भी
श्मशान नहीं है? परिवार में प्रेम और समर्पण है तो जीवन स्वर्ग है| मई पूछता हूँ :
प्रेम से भी बड़ा क्या दुनिया में कोई स्वर्ग है? नफ़रत से भी बड़ा क्या दुनिया में
कोई नर्क है|
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saty vachan ji
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