परिवार को सुखमय बनाना
है तो इन बातो को ध्यान से पढ़ना और ध्यान से समझना है जब हम सब इन बातो को ध्यान
से पढ़गे और समझेगे तब ही तो हम ये बाते अपनी परिवार को समझा पायेगे और अपने परिवार
को सुखमय और सफल बना पायेगे मै आपसे प्रार्थना करता हूँ कि एक बार पढ़ना जरुर पढ़ना
और समझना| आओ अब हम शुरू करते है -
(1)
माँ-बाप होने के नाते अपने बच्चो को खूब पढ़ाना-लिखना और पढ़ा-लिखाकर खूब लायक बनाना| मगर इतना लायक भी मत बना देना कि वह कल तुम्हे ही ‘नालायक’ समझने लगे| अगर तुमने आज यह भूल की कल बुढ़ापे में तुम्हे बहुत रोना-पछताना पडेगा| यह बात हम इसलिए कह रहे है क्योकि कुछ लोग यह भूल जिन्दगी में कर चुके है और वे आज रो रहे है| अब पछताने से क्या होगा जब चिड़िया चुग गयी खेत|
(2)
बच्चो के झगड़े में बड़ो और सास-बहु के झगड़ो में बाप-बेटे को कभी नहीं पड़ना चाहिए| संभव है कि दिन में सास-बहु में कुछ कहा-सुनी हो जाए तो स्वाभाविक है वे इसकी शिकायत रात घर लौटे अपने पति से करेगी| पतियों को उनकी शिकायत गौर से सुनानी चाहिए, सहानुभूति भी दिखानी चाहिए| मगर सुबह जब सोकर उठे तो “आगे पाठ-पीछे सपाट” की निति ही अपनानी चाहिए ,तभी घर की एकता कायम रह सकती है|
(3)
लक्ष्मी पुण्यई से मिलती है| मेहनत से मिलती हो तो मजदूरों के पास क्यों नहीं? बुद्धि से मिलती तो पंडितो के पास क्यों नहीं? जिन्दगी में अच्छी संतान ,सम्पत्ति और सफलता पुण्य से मिलती है| अगर आप चाहते है कि आपका इहलोक और परलोक सुखमय रहे तो पुरे दिन में कम से कम दो पुण्य जरुर करिये| क्योकि जिन्दगी में सुख ,सम्पत्ति और सफलता पुण्यई से मिलती है|
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